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Essay On Privatization In Hindi | निजीकरण क्या हैं और इसे उद्देश्य, लाभ, हानि पर निबन्ध

हेलो दोस्तों आज के इस टॉपिक privatization पर हम बात करने वाले हैं की इसका क्या मतलब होता है, इसके क्या उद्देश्य है, इसके लाभ और हानिया क्या क्या हैं? इन सभी बातो पर चर्चा करेंगे, क्योकि जिस तरह से पिछले कुछ सालो से देश में निजीकरण को लेकर जो बहस छिड़ी हुई है उससे हर कोई जानना चाहता है की क्यों सरकार निजीकरण को इतना बढ़ावा दे रही है |

हमने कभी पिछले कुछ सालो से निजीकरण जैसा शब्द नहीं सुना था शायद इसकी जरूरत नही पड़ी थी या फिर जरूरत थी तो इस मुद्दे को उठाया नहीं गया था देश के बड़े बड़े विरोधी दल सरकार पर आरोप लगती आ रही है की सरकार देश की सरकारी संस्थान और सम्पतियों को बेच रही है |

लेकिन जहाँ तक मुझे पता है की सरकार का यह मानना है की ऐसा कुछ भी नहीं है और शायद सरकार उन्ही संस्थानों जा निजीकरण कर रही है जहाँ सरकार ज्यादा ध्यान नहीं दे पा रही है और वहां के खर्चे उठाने में भी सरकार असमर्थ है इसीलिए सरकार शायद ऐसी संस्थानों का निजीकरण कर रही है |

जैसे कई एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन, बंदरगाह, लिमिटेड कंपनी और ऐसी तमाम आर्गेनाईजेशन का अभी तक निजीकरण कर दिया है चाहे उमसे बैंक ही क्यों ना हो और इसी तरह कई बैंको का भी विलय कर दिया है अब इसमें सरकार की क्या सोच नहीं या फिर उससे सरकार को घाटा आ रहा था जिसके कारण ऐसा करना पड़ा |

Essay On Privatization In Hindi : निजीकरण क्या है और निजीकरण पर निबन्ध

What is privatization in hindi : निजीकरण क्या है और इसका क्या मतलब होता है?

निजीकरण का मतलब सार्वजनिक कंपनी को निजी हाथ में सौंप देना यानी सरकार अपना नियन्त्रण छोड़ दे व कंपनी का नियंतरण निजी हाथो में सौंप दे | इसका आधार आंशिक तौर पर सरकार के लिए पूँजी उगाहना जिससे राजकोषीय स्थिति में सुधार हो, सरकारी ऋण बोझ कम हो | इससे पूँजी विस्तार बाजार का विस्तार होता है |

वित्तीय क्षेत्र के विकास में भी सहायता मिलती है साथ में एक उद्देश्य यह भी रहता है की निजीकरण से कंपनी की कार्यकुशलता व दक्षता में सुधार व देश के संसाधनों का ज्यादा कुशल उपयोग भी हो सकेगा |

लेकिन बस यह विश्वस्तरीय अनुभव है की कंपनीज के प्रदर्शन में स्वामित्व से ज्यादा महत्व रहता है प्रतिस्पर्धा बाजार और कंपनी के प्रबन्धन एवं कामकाज के संदर्भ में पर्याप्त स्वाय्यता मिले |

अनेक उदाहरण ऐसे रहे हैं जब सार्वजनिक कंपनी का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा है भारत में कुछ उदाहरण जैसे NTPC, ONGC का काम काज अच्छा रहा है |

Essay On Privatisation In Hindi
Image by Foundry Co from Pixabay
  • भारत के सार्वजनिक कंपनी के काम काज में अत्यधिक राजनितिक दखलंदाजी सार्वजनिक कंपनी की नियुक्तियों व उनका सामान्य काम काज भी अक्सर राजनितिक कारणों से प्रभावित रहा | उन कारणों से अक्सर अची कंपनी की अपनी पूर्ण क्षमता से काम नहीं कर पाती है इसी कारण से निजीकरण से लाभ हो सकता है |
  • भारत में मुख्यतः निजीकरण 2000-02 के बीच हुआ है कई सार्वजनिक कंपनीज का निजीकरण BSNL, BALCO, IPCL(Reliance) CMC आदि |
  • कई विवाद हुए BALCO का विवाद, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया |
  • निजीकरण के कुछ साल बाद उत्पादन व प्रदर्शन काफी बढ़ गया है |
  • निजीकरण में सरकार के पास प्रबंधन होने पर भी शेयर बाजार का दबाव आता है |

निजीकरण के उद्देश्य क्या क्या हैं ?

  1. सार्वजनिक उद्धमो की परिचालन दक्षता में सुधार करने के लिए |
  2. तेजी से औधोगिकिकरण के लिए व्यापार तैयार करना |
  3. विदेशी पूँजी को आमंत्रित करने के लिए |
  4. सरकार को घाटे में चल रहे उद्धमो से मुक्त करने के लिए |
  5. उद्योगों में प्रतिस्पर्धी कुशलता विकसित करने के लिए |

निजीकरण के लाभ क्या क्या हैं ?

  • बढती प्रतिस्पर्धा : उद्योग में विदेशी फर्मो के प्रवेश से भारतीय कंपनी के लिए बाजार की प्रतिस्पर्धा बड गयी है विशेष रूप से दूरसंचार, एयरलाइन, बैंकिंग, बीमा आदि उद्योगों में जो पहले सार्वजनिक क्षेत्र में थे |
  • बेहतर दक्षता : लाभ प्रोत्साहन के कारण निजी कंपनीज यह सुनिश्चित करेंगी कि वे अपनी लागत कम करने और मुनाफे में सुधार के लिए अपनी परिचालन क्षमता में सुधार करे |
  • बहुराष्ट्रीय कंपनीज की संख्या में लगातार वृद्धि |
  • GDP का विकास |

निजीकरण की हानियाँ क्या क्या है?

  1. सामाजिक हित के स्थान पर स्वहित बढेगा |
  2. सार्वजनिक क्षेत्र की कमी होगी |
  3. वस्तुओ और सेवाओं का मूल्य बढ़ जाएगा |
  4. गरीब वर्ग को और अधिक संघर्ष करना पढ़ेगा |

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Final Word :

अभी के समय सरकार ने जितना निजीकरण करना था कर लिया है और आगे जाकर क्या क्या निजीकरण करेगी उसका कोई अंदाजा नहीं है | मेरा मानना है की अगर सरकार निजीकरण कर भी रही है तो कंपनी स्वदेशी ही होनी चाहिए जितना हो सके बाहरी कंपनी ना हो |

हमारे देश में विदशी कंपनीज ने जिस तरह अपना अधिपत्य जमा रखा है हमे इससे बेहतर स्वदेशी कंपनी को मौका देना है और अगर निजीकरण हो भी रहा है तो इसका मतलब यह नहीं है की बेचा जा रहा है |

निजीकरण के अपने फायदे भी है तो कुछ नुकसान भी है और सरकार सभी बातों को ध्यान में रखकर चल रही है कोई नहीं चाहता है की देश का नुकसान हो |

FAQs..

निजीकरण क्या भारत के लिए एक खतरा है?

नहीं ऐसा नहीं है जो संस्थान सरकार कंपनी के हाथो में दे रही है उसका मतलब नहीं है की वो बर्बाद हो जाएगी और इससे देश को नुकसान होगा और ना ही सरकार किसी को बेच रही है |
ऐसे कई उदाहरण जैसे ONGC, BSNL, NTPC, HP जैसे संस्थान हैं जिनका रिकॉर्ड हमेशा अच्छा रहा है |

निजीकरण का विरोध क्यों किया जा रहा है?

निजीकरण का विरोध देश में विरोधी राजनितिक पार्टी कर रही है उनका सरकार पर आरोप है की सरकार इस तरह से पूरे देश को बेच देगी |
राजनीति में आरोप प्रत्यारोप तो चलते रहते हैं लेकिन ऐसा नहीं है की निजीकरण पूरी तरह से सफल है इसके अपने लेवल पर नुकसान भी हैं मान लो अगर इंडियन रेलवे का पूरी तरह से निजीकरण हो जाए तो भले ही सुख सुविधाए बहु अच्छी रहेंगी लेकिन आम गरीब जनता इतना महंगा किराया नहीं दे पाएगी |

सरकार का निजीकरण करने का क्या कारण है?

मेरा अपना पर्सनल मानना यह है की जिन सरकारी सम्पति और संस्थान का सरकार ख्याल नहीं रख पा रही है और उनकी maintenance cost भी ज्यादा आ रही हैं तो सरकार उन सम्पतियों को निजी हाथो में सौंप रही है जिससे उनका संचालन सही से हो सके |

क्या निजीकरण से देश में विकास होगा ?

देश के विकास का तो पता नहीं लेकिन टेक्नोलॉजी बदल जाएंगी, सुख सुविधाए बढ़ जाएंगी जिससे महंगाई का बढ़ना भी जायज है और इसका फायदा सिर्फ उच्च वर्ग के लोगो के लिए ही होगा क्योकि गरीब वर्ग पैसे खर्च नहीं कर सकता है |

Vikram mehra

मेरा नाम विक्रम मेहरा है मै उत्तराखंड का रहने वाला हु मैंने B.sc (PCM) से की हुई है और मुझे टेक्नोलॉजी, साइंस और लोगो को अपने ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा देना बहुत पसंद है मेरा मकसद ऑनलाइन माध्यम से लोगो तक इनफार्मेशन पहुचाना है और साथ ही मुझे मूवीज देखना, घूमना बहुत पसंद है |

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