History Of Taliban And Afghanistan In Hindi | तालिबान और अफगानिस्तान का इतिहास

दोस्तों आज के इस टॉपिक Taliban and Afghanistan in hindi के इतिहास में एक ऐसे विषय पर बात करेंगे जिसके बारे में पूरी दुनिया जानने को उत्सुक है चाहे taliban की बात करे या फिर afghanistan की इस दोनों का कनेक्शन आपस में इतना जुड़ा है की इन दोनों का इतिहास एक दुसरे से बिल्कुल भी अलग नहीं है |

तालिबान की शुरुआत पाकिस्तान और अफगानिस्तान के इर्द गिर्द ही आपको देखने और सुनने को मिलेगा जिससे आप इस बात का अंदाजा लगा सकते है की तालिबान इन दो देशो में कितना फैला हुआ है अब चाहे अफगानिस्तान का इतिहास हो या तालिबान का इतिहास ये दोनों ये अपने आप ही में काफी चिंताजनक है |

History Of Taliban And Afghanistan In Hindi : तालिबान और अफगानिस्तान की शुरुआत

तालिबान नेता पाकिस्तान के उन्ही मदरसों से आते हैं जिनसे निकले जैश, लश्कर के आतंकी हैं |

अफगानिस्तान पर तालिबानी कब्जे के बीच काबुल एयरपोर्ट से मानवीय त्रासदी की सामने आ रही तस्वीरे बहुत कुछ बया कर रही है ये बाते अभी हाल ही के समय की जब अमरीकी सेना अफगानिस्तान छोडकर चले जाती हैं इसके अलावा कई देशो के राजदूत और नागरिक यहाँ के हालात को देखकर अपने देश चले गये हैं |

अमेरिका के जाने का यह तरीका अफगानिस्तान को अधर में छोड़ने के उसके निर्णय से कही अधिक भयानक इसीलिए है क्योकि इससे पाकिस्तान द्वारा संचालित जिहादी आतंक के सिंडिकेट को यह सन्देश गया की आतंकवाद के माध्यम से उसने सोवियत संघ के बाद अब एक और महाशक्ति और विश्च के सबसे बड़े सैन्य गठजोड़ को हरा दिया |

यह पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसी ISI को मध्य एशिया के देशो में तालिबान जैसे ही कट्टरपंथी अभियानों के जरिये एक आतंकी साम्राज्य की मूल योजना पर दोबारा से काम करने के लिए उत्साहित करेगा दुःख की बात है की अफगानिस्तान में एक चुनी गई सरकार का हिस्सा से तख्तापलट कर रहे तालिबान से अमेरिका लगातार दोहा में राजनयिक स्तर पर बात कर रहे हैं |

यह वही अमेरिका है जिसने 9/11 हमले के बाद अल कायदा और तालिबान के विरुद्ध अपनी लड़ाई को आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक युद्ध का नाम दिया आज उसी अमेरिका के राष्ट्रपति कह रहे हैं की उन्हें बस इससे सरोकार है की अमेरिकी धरती पर कोई हमला ना हो |

अमेरिकी असफलता का सबसे बड़ा उदहारण यह है की आज तालिबान अफगानिस्तान के उतने क्षेत्रफल पर काबिज हो चूका है जितने पर वह 9/11 के बाद अमेरिकी हमले के समय भी नहीं था इससे भारत और मध्य एशिया के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न हो गया है क्योकि पाकिस्तान को अफगानिस्तान में वः सामरिक पैठ मिल गयी है जिसकी तलाश में वः 1971 में भारत से मिली हार के बाद से ही था |

पिछले एक हजार साल का इतिहास यह बताता है की काबुल में कट्टरपंथी ताकतों का उभर भारत की सुरक्षा को प्रभावित करता है ऐसे में यह सोचना सही नहीं है की आज का तालिबान बदल गया है या सुधर गया है शायद कही अधिक ताकतवर हो गया है अभी वह ऐसा कुछ करने से बच रहा है जिससे वह 20 साल पहले युद्ध के बाद प्राप्त हुई उसकी सत्ता के लिए पडोसी देशो और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की ओर से कठिनाई बढे |

दरअसल अमेरिका का अफगानिस्तान को तालिबान के हवाले होने देना 9/11 के दो दशक बाद आतंकवाद के विरुद्ध युद्ध में पश्चिमी देशो की घटती दिलचस्पी और बड़ी वैश्विक ताकतों के बीच सदियों से चलती आ रही भू-राजनितिक प्रतिद्वान्द्वित्ता के खेल की वापसी को इंगित करता है |

History Of Taliban And Afghanistan In Hindi
History Of Taliban And Afghanistan In Hindi

अमेरिका को लगता है की अफगानिस्तान में तालिबान जैसी इस्लामिक कट्टरपंथी शक्ति के उभार से चीन के शिनजियां प्रान्त में इस्लामिक शक्तियों को बल मिलेगा साथ ही पूरे अफगानिस्तान-पाकिस्तान क्षेत्र में आतंकी जमावड़े और उथल-पुथल से चीन की BRI जैसी योजनाये सुरक्षित नहीं रह पाएगी इसी तरह मध्य एशिया में इस्लामिक कट्टरपंथ के विस्तार से रूस की भी समस्या बढेगी |

अफगानिस्तान चार दशको से ऐसे युद्धों से ग्रस्त रहा है जिनमे महाशक्तियां शामिल रही हैं इसके चलते पैसे के लिए लड़ने और पाला बदलने वालो की संख्या वहा बहुत है आशंका यह है की तालिबान नेताओ से मुलाकात के बाद भी चीनी ख़ुफ़िया एजेंसी ने तालिबान के समक्ष अफगान सेना के बिना लड़े समर्पण को संभव बनाने में अहम् भूमिका निभाई |

अफगानिस्तान की आर्थिक स्थिति दयनीय है और अमेरिका के हाथ खीच लेने के बाद वह और बिगड़ेगी ऐसे में तालिबान को आर्थिक सहायता की दरकार होगी जो फिलहाल चीन मुहैया करा सकता है चीन का प्रयास है की पाकिस्तान के सहयोग से इन इस्लामी कट्टरपंथीयो का रुख भारत की ओर मोड़ दिया जाए |

वैसे चीन इस रणनीति पर पहले से काम करता रहा है और इसी उद्देश्य से मौलाना मसूद अजहर जैसे आतंकियों को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वर्षो तक बचाता रहा |

एक और सच्चाई यह भी है की तालिबान में वर्चस्व रखने वाले अधिकांश पख्तून अंग्रेजो द्वारा खिची गई डूरंड रेखा को नकारते हैं जो आज अफगानिस्तान और पाकिस्तान की सीमा है यही सोच रखने वाले हथियारबंद पख्तून संगठन डूरंड रेखा के दूसरी ओर पाकिस्तान में भी है |

यह भी एक तथ्य है की अफगानिस्तान का ऐतिहासिक रूप से एक देश के रूप में 18वी सदी में अहमद शाद अब्दाली से उभार से पहले कोई अस्तित्व नहीं रहा था आज वहां की करीब 50 फीसदी से अधिक आबादी ताजिक, उजबेक और हजाराओ की है |

जो तालिबान शासन को लेकर असहज है ऐसे में पाकिस्तान और अफगानिस्तान दोनों का ही विभाजन के कगार तक अस्थिर होना संभव है पाकिस्तान के इस नए आतंकी साम्राज्य को नष्ट करने के लिए भारत को उस भू-राजनितिक खेल को खेलना ही होगा जिसके चलते तालिबान को अफगानिस्तान की सत्ता हासिल हुई है |

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Final Words :

तो दोस्तों इस टॉपिक में हमने taliban and afghanistan in hindi के दोनों हिस्सों को एक साथ जोड़कर शुरुआत से लेकर अभी तक के हालात के बारे में संक्षिप्त में बताया है |

हमे इस समस्या के बारे में गंभीरता से सोचता है और इसके लिए जितना हो सके अपना योगदान है देना इससे निपटने के लिए |

Vikram mehra

मेरा नाम विक्रम मेहरा है मै उत्तराखंड का रहने वाला हु मैंने B.sc (PCM) से की हुई है और मुझे टेक्नोलॉजी, साइंस और लोगो को अपने ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा देना बहुत पसंद है मेरा मकसद ऑनलाइन माध्यम से लोगो तक इनफार्मेशन पहुचाना है और साथ ही मुझे मूवीज देखना, घूमना बहुत पसंद है |

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