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NET-ZERO Emission क्या है और नेट-जीरो उत्सर्जन का क्या मतलब है

दोस्तों हाल ही में इटली में हुई G20 सम्मेलन के बाद हुए COP26 शिखर सम्मेलन में कुल 26 देशो के साथ भारत भी शामिल था जहाँ जलवायु परिवर्तन सबसे अहम मुद्दा था जिसमे इन सभी देशो ने इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा की |

COP26 का शिखर सम्मेलन जो की स्कॉटलैंड के ग्लासगो में हुआ था जहाँ पूरी दुनिया क तमाम देशो के राजनेता पहुचे थे जिसमे भारत के प्रधानमंत्री भी इस सम्मेलन का हिस्सा थे |

प्रधानमंत्री ने ग्लासगो में भारत में 2015 के बाद पहली बार national determined contribution (NDC) की घोषणा की जिसमे प्रधानमंत्री ने 2070 तक net-zero emission का लक्ष्य निर्धारित करने की पहल रखी |

सबसे बड़ी ख़ास बात यह है की प्रधानमंत्री ने इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए विकसित देशो से जलवायु वित्त का तहत एक ट्रिलियन डॉलर की मांग की जिससे यह राशि तमाम गरीब और विकाशील देशो में जलवायु परिवर्तन के लिए उपयोग किया जा सके |

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प्रधानमंत्री ने पांच ऐसे लक्ष्यों पर अपनी बात राखी जो आने वाले समय के लिए भारत इस लक्ष्य को पूरा करने की पूरी कोशिश करेगा :

  1. 2030 तक Non-fossil energy capacity को 500 गीगावाट तक पहुचाएगा जोकि अभी तक के कोयले की स्थापित क्षमता के दोगुने से अधिक है |
  2. 2030 तक एक बिलियन टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने की पूरी कोशिश करेगा |
  3. 2030 तक अपनी कुल जरूरत की उर्जा की आवश्यकता का 50 % नवीकरणीय उर्जा में पूरा करेगा |
  4. 2030 तक किसी भी हाल में भारत अपनी कार्बन इंटेंसिटी को 45 % तक कम करेगा |
  5. 2070 तक भारत Net-zero emission का लक्ष्य हासिल करेगा |

इससे पहले के NDC की घोषणा में ये पांच लक्ष्य नहीं थे ये इस साल के मुख्य मुद्दों में सबसे जरुरी मुद्दे थे |

NET-ZERO Emission क्या है और नेट-जीरो उत्सर्जन का क्या मतलब है
Image by Darwin Laganzon from Pixabay

नेट-जीरो उत्सर्जन क्या है : What is Net-zero emission in hindi

अगर साधारण भाषा में कहे तो इसका मतलब ग्रीनहाउस गैस के बढ़ने से वातावरण में बढती ग्लोबल वार्मिंग और जिसकी वजह से जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बढ़ गया है इसे कम करने के लिए इंसानों के द्वारा एक नयी कार्बन सिंक तकनिकी जैसे जंगल जोकि उतनी ही मात्रा में कार्बन को ग्रहण कर ले, यह एक नेट-जीरो उत्सर्जन है |

वैज्ञानिको का कहना है की वैश्विक उत्सर्जन के लिए लगभग 2030 तक हम इसमें कुछ सुधार की राह तक पहुच सकते हैं और 2050 तक नेट-जीरो तक पहुच सकते हैं कई देशो ने तो 2050 तक पानी डेडलाइन बना ली है |

चीन जैसे देश ने 2060 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने का एलान कर लिया है इसी तरह कई देशो ने भी आने वाले सालो में अपना लक्ष्य बना लिए है जिसकी लिस्ट आप देख सकते हैं

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पूरी दुनिया में दो इए देश हैं जिन्होंने नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य पहले ही हासिल किया है जिन्हें हम कार्बन नेगेटिव देश कह सकते हैं और वे देश तिब्बत और अफ्रीका महाद्वीप का एक छोटा देश सूरीनाम है |

टॉप कुछ ऐसे देश जो सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन प्रोडूस करने वालो की लिस्ट में हैं:

  1. चीन (27.2%)
  2. अमेरिका (14.6%)
  3. भारत (6.8%)
  4. रूस (4.7%)
  5. जापान (3.3%)
  6. बाकी के देश (15.8%)

जरा आप देखे तो पूरी दुनिया में चाइना ही एक ऐसा देश है जो सबसे ज्यादा कार्बन उत्सर्जन करता है उसके बाद अमेरिका, भारत रूस और जापान भी इसी तरह से कार्बन उत्सर्जन में भागीदार हैं |

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तिब्बत ने इस बात को गंभीरता से लेते हुए इस पर पिछले दशक से काम करना शुरू कर दिया और इस देश के जमीन के 60% भूमि पेड़ो से घिरी हुई हैं और बाकी के पश्चिमी देश और यहाँ तक की चाइना जैसे देशो ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया और अब जाकर एक दुसरे पर आरोप लगाते फिर रहे हैं |

एक रिपोर्ट्स के मुताबिक जलवायु परिवर्तन की वजह से भारत आने वाले 2050 तक 6 ट्रिलियन डॉलर का आर्थिक नुकसान झेल सकता है |

साल 1995 में सालाना 2350 करोड़ मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन होता था लेकिन अब वर्ष 2021 में यह आंकड़ा 4000 करोड़ मीट्रिक टन का सालाना का आंकड़ा पहुच गया है |

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Final Word :

मै उम्मीद करता हु की आपको Net Emmision के बारे में जानकर अच्छा लगा होगा क्योकि आज के समय ये काफी महत्वपूर्ण टॉपिक है जिसके बारे में हर कोई बात कर रहा है जिसका आज के हमारे वातावरण के हिसाब से काफी जरुरी टॉपिक है |

Vikram mehra

मेरा नाम विक्रम मेहरा है मै उत्तराखंड का रहने वाला हु मैंने B.sc (PCM) से की हुई है और मुझे टेक्नोलॉजी, साइंस और लोगो को अपने ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा देना बहुत पसंद है मेरा मकसद ऑनलाइन माध्यम से लोगो तक इनफार्मेशन पहुचाना है और साथ ही मुझे मूवीज देखना, घूमना बहुत पसंद है |

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