Think Again Book Summary In Hindi By Adam Grant

हेलो दोस्तों क्या आपकी सोच ही आपको आगे बढ़ने से रोक रही है ? या फिर आप सिर्फ ट्रेडिशनल तरीके से ही सोचते हो | आपका सोचने का क्या तरीका है और आपको क्या सोचना चाहिए जिसके बारे में हम इस बुक समरी में बात करने वाले हैं | इस बुक समरी को पढकर आपका सोचने का अंदाज बदल जाएगा और यदि आपकी thinking में ही कोई समस्या है तो आप उसमे भी सुधार ला सकोगे | यदि आप ऐसा कर लोगे तो आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता है |

Think Again Book Summary In Hindi | Think Again Audiobook Summary

तो चलिए इस किताब Think Again के सभी महत्वपूर्ण चैप्टर्स की सक्षिप्त समरी के माध्यम से जानने की कोशिश करते हैं |

1.Conventional Vs Alternative Intelligence

दोस्तों लेखक इस चैप्टर को एक कहानी से समझाने की कोशिश करते हैं एक बार जंगल में आग लग जाती है उसे बुझाने के लिए रेस्क्यू टीम को बुलाया जाता है उन्हें निर्देश दिए गये थे की आपके सारे उपकरण सही समय पर काम करने चाहिए जिससे आग बुझाने में मदद मिल सके |

जैसे ही वे जंगल में आग बुझाने गये तो आग बेकाबू हो चुकी थी वे हर संभव कोशिश कर रहे थे लेकिन उनकी सारी मेहनत किसी काम की नहीं थी धीरे-धीरे वे आग की लपटों में आ गये, सभी लोग जंगल से बाहर भागने लगे, लेकिन उनके उपकरण इतने भारी थे की वे भाग नहीं पाए |

उनमे से एक व्यक्ति ने अपनी सूझबूझ से सारे उपकरण वही छोड़कर जंगल से बाहर निकल गया जिससे उसे भागने में आसानी हुई और वो अंत में जिन्दा बच गया |

दोस्तों इस कहानी से ये पता चलता है की हमे हर समय ट्रेडिशनल तरीके से ही नहीं सोचना चाहिए बल्कि परिस्थिति के हिसाब से अपनी सोच बदलनी चाहिए |

इसी तरह से आज के समय लोग सिर्फ conventional thinking की तरफ ध्यान देते हैं उन्हें सिर्फ आर्डिनरी लाइफ जीना पसंद होता है वे कुछ भी नया नाही करते हैं और ना ही सोचते हैं हमे अपनी इसी conventional thinking को छोडकर आगे बढ़ना चाहिए |

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2.Three Types Of Talkers (Think Again Book In Hindi)

जब भी हम किसी से बात करते है या कोई हमसे बात करता है तो उनके अंदर सामान्य तौर पर तीन तरह के किरदार होते हैं :

(1).Preacher : कई बार जब हम सामने वाले को काफी देर तक समझाने लगते है तो इसी किरदार में आ जाते हैं हम उन्हें अच्छे-बुरे का ज्ञान देने लगते हैं ये जाने बगैर की सामने वाला क्या बात करना चाहता है या फिर उसका क्या नजरिया है |

(2).Prosecutors : इस तरह के किरदार में हम हर तरह के बहस को जीत लेना चाहते हैं हम बेफिजूल के तर्क देकर अपनी बात को सही साबित कर लेते हैं |

(3).Politicians : इस किरदार में हम दूसरो को अपनी बातो से लुभाने की कोशिश करते हैं जैसा सामने वाला सुनना चाहता है उसे वही बोलते हैं क्योकि इसमें हम अपना मकसद हासिल करना चाहते हैं |

दोस्तों लेखक का कहना है की हमारा बात-चीत करने के ये तरीके बिलकुल गलत होते हैं क्योकि हम बिना सोचे बोलते रहते हैं हमे तर्क के साथ बात करनी चाहिए बिना किसी फैक्ट, डाटा के हम रोबोट की तरह बात नहीं कर सकते हैं |

3.Type Of Confidence (Think Again Summary In Hindi)

लेखक का कहना है की लोगो में कॉन्फिडेंस दो तरह के होते हैं : राईट कॉन्फिडेंस और wrong कॉन्फिडेंस | जिसमे wrong confidence भी दो तरह का होता है : Over Confidence और Low Confidence.

Over Confidence वाले लोग ये सोचते हैं की उन्हें सबकुछ पता है उनके जितना ज्ञान किसी के पास नहीं है ऐसे लोग Armchair Quarterback Syndrome से ग्रसित होते हैं और यही wrong confidence हमारी असफलता का कारण बनती हैं ये हमे हमारी कमियों का एहसास नहीं होने देता है जिससे हम सफल नही हो पाते हैं |

इसीलिए खुद ही देखे की कहाँ कमी रह गयी है कही आपमें ही ये दो तरह के wrong confidence तो नहीं हैं इसमें सुधार करके आपको राईट कॉन्फिडेंस रखना होगा |

4.Being Wrong Is OK (Think Again Audiobook In Hindi)

कुछ लोगो को लगता है की उन्हें कोई कुछ भी गलत ना बोले, लोग उनके विचारों से सहमत होने चाहिए | भले ही आपके विचार एकदम सही हो, लेकिन ऐसा तभी होता है जब आपके अंदर घमंड आ जाता है | उसे बर्दाश्त नही होता है की कैसे कोई उसकी सोच को गलत बोल सकता है |

लेखक का भी यही कहना है की आपकी ऐसी सोच बिलकुल भी सही नहीं हैं शायद पहले आपकी सोच सही रही होगी, लेकिन अभी के समय वक्त के साथ-साथ चीजे बदल जाती हैं और आपको भी समय के साथ अपने विचार बदलने चाहिए |

कुछ लोग एकतरफा ही अपना नजरिया रखते हैं फिर चाहे कोई भी मुद्दा क्यों ना हो, वे आँख बंद करके उन बातों को फॉलो करते रहते हैं ऐसे लोगो को सभी पहलुओ पर ध्यान देना चाहिए

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5.Conflict Handling (Think Again Book By Adam Grant In Hindi)

हम इंसान एक सामाजिक प्राणी ही हैं और समाज में रहते हुए विवाद होना लाजमी होता ही है और कैसे इन विवादों से निपटना चाहिए ये हमे सभ्य तरीके से सीखना चाहिए |

ये विवाद हमारे लाइफ में आमतौर होते रहते हैं जैसे ये विवाद हमारे ऑफिस में भी हो सकते हैं यदि कोई प्रोजेक्ट जो काफी पेचीदा है जिससे हर कोई पीछा छुड़ाना चाहता है लेकिन ये अंत में एक conflict का रूप ले लेती है |

इसी तरह का विवाद हमारे रिलेशनशिप में भी होता है और इसके कई कारण हो सकते हैं चाहे मनमुटाव हो, झगडे हो या फिर धोखा हो |

ऐसे में हमे एकसाथ मिलजुल कर रहने और काम करने की जरूरत होती है और अपने ego को बीच में लाने की जरूरत नहीं होती है |

6.Interpersonal Rethinking

कई बार डिबेट में कुछ लोग दार्शनिक बन जाते हैं और बड़े-बड़े भाषण देते रहते हैं और अपने विचारों को दूसरो पर थोपते हैं जो की बहुत गलत तरीका होता है आपको जब भी कोई डिबेट करनी हो तो प्रैक्टिकल और साइंटिफिक तरीको से अपने बात को रख सकते हैं और दूसरो को भी मौका देना चाहिए |

जब आप सामने वाले को प्रश्न पूछे तो आपका प्रश्न लॉजिकल होना चाहिए | छोटी-छोटी बातो पर बड़े-बड़े लेक्चर देने की कोई जरूरत नहीं हैं |

बेवजह की डिबेट और बहस सिर्फ विवाद पैदा कर देती हैं आपको सामने वाले की प्रॉब्लम को समझकर सिर्फ उतना भी जवाब देना है जितना उसने पूछा है और अदब के साथ पेश भी आना सीखना होगा |

7.Rivals And Friends (Think Again By Adam Grant In Hindi)

हम अपने लाइफ के राइवल और फ्रेंड ढूंढ ही लेते हैं और हम अपने राइवल को ही अपना दुश्मन समझ लेते हैं हम उसके नजरिये को जानने की कोशिश भी नहीं करते हैं ऐसे में हम सिर्फ उन्ही को मानते हैं जिनसे हमारी bonding अच्छी होती है और हमे जिनकी हर बार अच्छी लगती है

ऐसे में हम एक ही तरह के विचारों में बंध जाते हैं हमे लगता है की जो हम सोचते हैं पूरी दुनिया भी ऐसा ही सोचती है जबकि ऐसा नहीं होता है अगर हम इस बन्धन से मुक्त हो जाए तो हमे पता चलेगा की हम कितने गलत हैं |

हमे किसी एक की ही सुनने के बजाय सभी की एकबार सुन लेनी चाहिए, क्योकि कई मुद्दों पर सभी की राय एक जैसी ही होती है जिसमे हम अपने राइवल के साथ भी रिस्पेक्ट वाला व्यवहार करने लगते हैं |

उन लोगो की कुछ ऐसी बाते जो काफी काम की हो सकती हैं और उन्हें मानकर हम फ्रेंड भी बन जाते हैं |

8.Binary Issues (Think Again Audiobook Summary In Hindi)

कई बार हमे अलग-अलग तरह के लोगो के साथ डील करनी पड़ती है जिनका नजरिया और सोच दूसरो से अलग होती है जैसे लेखक कहते हैं की वे एक बार किसी फंक्शन में भाषण देने गये थे जहाँ अलग-अलग समुदाय के लोग थे |

जब वे किसी एक समुदाय के बारे में बात कर रहे थे तो दुसरे समुदाय के लोग उनकी बातों से सहमत नहीं थे ऐसे में उन्होंने साइंटिफिक तरीके से सोचा और सभी पक्ष में अपनी राय रखी और अंत में उनसे उनकी राय पूछी |

फिर उन लोगो ने खुद ही अपने सारे मुद्दे बताने शुरू कर दिए, जो लेखक ने पहले कभी नहीं सुने थे और अंत में वे एक दुसरे की बात समझने लगे |

इसीलिए कभी भी लोगो को बेवजह का भाषण पसंद नहीं आता है उन्हें सारी बाते फैक्ट के साथ सुनना पसंद होता है |

9.Ever-Changing World

दोस्तों आज के समय पूरी दुनिया बहुत तेजी से बदल रही है और लोग भी बहुत तेजी से बदल रहे हैं और सोचने का तरीका और व्यवहार भी बदल रहा है लेकिन अभी भी कुछ ऐसे लोग हैं जो बदलना नहीं चाहते हैं वे अपनी पुरानी सोच में ही बंधे रहते हैं |

आपने देखा होगा की जब कोई समाज में नया बदलाव लाने की सोचता है कुछ लोग उनका भी विरोध करने लगते हैं जैसे मार्किट में कुछ भी नया ट्रेंड आता है तो लोग उसे आसानी से एक्सेप्ट नहीं करते हैं लेकिन धीरे-धीरे वे उसे अपनाने लगते हैं |

इसीलिए हमे समय के साथ बदलाव के लिए तत्पर रहना चाहिए भले ही शुरुआत में दिक्कत होती है लेकिन एक बार हैबिट में आ जाने से सबकुछ आसान हो जाता है |

कुछ साल पहले तक जब इन्टरनेट और टेक्नोलॉजी का जमाना ज्यादा नहीं था तो कई सारे काम मैन्युअल ही किये जाते थे लेकिन आज के समय टेक्नोलॉजी इतनी बढ़ गयी है की सब कुछ आटोमेटिक हो गया है और लोगो ने भी धीरे-धीरे इसे अपना लिया है चीजे बहुत फ़ास्ट हो गयी हैं |

इसी तरह से आने वाले समय में और बदलाव होंगे, हमे उन्ही बदलाव के साथ-साथ आगे बढ़ते रहना है |

10.Rethinking In Corporate World

 आज के समय में कॉर्पोरेट वर्ल्ड में भी rethinking की बहुत जरूरत है बड़े-बड़े आर्गेनाईजेशन जो अभी भी पुरानी कार्यप्रणाली से काम कर रहे हैं वे एक दिन बहुत पीछे हो जाती हैं |

जैसे एक समय में डीवीडी प्लेयर, सीडी का काफी प्रचलन था लेकिन आज के दौर में सबकुछ बदल गया है क्योकि इन्होने खुद को नयी टेक्नोलॉजी के साथ नही बदला कई कंपनीज ऐसी हैं जो एक दौर में बहुत फेमस थी लेकिन आज के समय में वे ख़त्म हो चुकी हैं |

कॉर्पोरेट वर्ल्ड में सभी को एक टीम वर्क के साथ काम करना पड़ता है जहाँ सभी को rethinking की आदत बनानी चाहिए | ऐसे में सभी की राय सुनकर और समझकर नतीजे पर पहुचना चाहिए |

लेखक कहते हैं की हमे सिर्फ छोटे लक्ष्य तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि समय-समय पर अपना मूल्यांकन करना चाहिए क्योकि हो सकता है समय के साथ अपना लक्ष्य बदलना पड़े|

हमे समय के साथ फ्लेक्सिबल रहना चाहिए लेकिन ये तभी होगा जब आप rethinking करोगे|

Vikram mehra

मेरा नाम विक्रम मेहरा है मै उत्तराखंड का रहने वाला हु मैंने B.sc (PCM) से की हुई है और मुझे टेक्नोलॉजी, साइंस और लोगो को अपने ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा देना बहुत पसंद है मेरा मकसद ऑनलाइन माध्यम से लोगो तक इनफार्मेशन पहुचाना है और साथ ही मुझे मूवीज देखना, घूमना बहुत पसंद है |

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